नई दिल्ली। भारतीय शतरंज के युवा खिलाड़ी आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 टाइटल जीतकर इतिहास रच दिया है। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी सफलता से पूरे देश में प्रसन्नता की लहर है।  प्रतियोगिता के आखिरी दौर में प्रज्ञानंद का मुकाबला जर्मनी के विंसेंट कीमर से था। प्रतियोगिता जीतने के लिए उन्हें यह मुकाबला क्लासिकल फॉर्मेट में जीतना जरूरी था। दबाव के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया और शानदार जीत दर्ज की। जीत के साथ उनके कुल 18 अंक हो गए और वह अंक तालिका में पहले स्थान पर पहुंच गए।नई दिल्ली। भारतीय शतरंज के युवा खिलाड़ी आर. प्रज्ञानंद ने नॉर्वे चेस 2026 टाइटल जीतकर इतिहास रच दिया है। 20 वर्षीय ग्रैंडमास्टर प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी सफलता से पूरे देश में प्रसन्नता की लहर है।

प्रतियोगिता के आखिरी दौर में प्रज्ञानंद का मुकाबला जर्मनी के विंसेंट कीमर से था। प्रतियोगिता जीतने के लिए उन्हें यह मुकाबला क्लासिकल फॉर्मेट में जीतना जरूरी था। दबाव के बावजूद उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया और शानदार जीत दर्ज की। जीत के साथ उनके कुल 18 अंक हो गए और वह अंक तालिका में पहले स्थान पर पहुंच गए।

नॉर्वे चेस दुनिया के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शतरंज टूर्नामेंट्स में गिना जाता है। इसमें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी भाग लेते हैं। ऐसे टूर्नामेंट का खिताब जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि माना जाता है। प्रज्ञानंद ने टाइटल जीतकर भारतीय शतरंज के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया है।

प्रतियोगिता में उनकी शुरुआत ज्यादा अच्छी नहीं रही थी। शुरुआती चरण के बाद वह तीसरे स्थान पर थे। हालांकि, हार नहीं मानी और लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए वापसी की। प्रतियोगिताके दूसरे चरण में उन्होंने शानदार खेल दिखाया और धीरे-धीरे शीर्ष खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। प्रज्ञानंद की सबसे बड़ी उपलब्धि दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल शतरंज में दो बार हराना रही। आखिरी दौर में खिताब की दौड़ बेहद रोमांचक थी। अमेरिकी खिलाड़ी वेस्ली सो भी खिताब के मजबूत दावेदार थे, लेकिन उनके मुकाबले का परिणाम प्रज्ञानंद के पक्ष में गया।