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आज भी प्रसंगिक हैं ‘वीर सावरकर’…

आज भी प्रसंगिक हैं ‘वीर सावरकर’…प्रशांत पोळ

आज २८ मई, स्वातंत्र्यवीर सावरकर जयंती। १४३ वर्षों के बाद, आज भी सावरकर प्रासंगिक हैं, समयोचित हैं।

जब भी मन में नैराश्य आए, अवसाद होने लगे तो अंदमान के काले पानी की काल कोठड़ी में कैद, जूट के कपड़े पहने, हाथों में लोहे की वजनी बेड़ियाँ पहने सावरकर को याद कीजिये। कोल्हू को बैल की जगह खुद चलाकर, उससे तेल निकालने वाले और दो – दो आजन्म कारावास भोग रहे सावरकर को याद कीजिये, जिनका छूटना तो क्या, उस काल कोठड़ी से बाहर निकलना भी दूभर लग रहा है। ऐसी विषम, प्रतिकूल, और मन तो पूर्णतः तोड़ देने वाली विपरीत परिस्थिति में भी सावरकर निर्भयता से कह रहे हैं–

अनादी मी, अनंत मी, अवध्य मी भला

मारील रिपू जगती असा कवण जन्मला..!

मैं अनादी हूँ, मैं अनंत हू, मैं तो अवध्य (अर्थात जिसका वध नहीं हो सकता) हूँ। मुझे मारने वाला राक्षस अभी पैदा भी नहीं हुआ है।

क्या अद्भुत आत्मविश्वास है, क्या जिजीविषा है, क्या जीवटता है… यदि इस अवस्था में सावरकर ऐसा सोच सकते हैं, तो हम और आप क्या चीज हैं.. सावरकर यह पांच अक्षरों का बीज मंत्र है, नैराश्य और अवसाद (डिप्रेशन) दूर करने का…!

मुझे लगता है, शायद इजराइल ने सावरकर जी को अपना राष्ट्र पुरुष मान लिया है। सावरकर जी ने चालीस के दशक के प्रारंभ में जो-जो कहा, इजराइल ने अक्षरशः वैसा ही किया। अर्थात, इजराइल के तत्कालीन नेताओं को राष्ट्र खड़ा करने का यह मूलमंत्र मालूम होगा। इसीलिए, ९० लाख जनसंख्या का इजराइल आज दुनिया का एक दबंग राष्ट्र है। सावरकर जी भी वही बताते रहे –

* अपनी मातृभाषा में, राष्ट्रभाषा में शिक्षा दो

* सैनिकी शिक्षा अनिवार्य करो

* देश की सीमाएं सुनिश्चित करो, सीमाएं तलवार की धार से निश्चित होती हैं, चरखे के धागे से नहीं

* देश को शस्त्र सज्ज करो

हमने इसमें एक भी तत्व नहीं माना। सीमाओं की तो हमने ऐसी उपेक्षा की, कि सारा गिलगिट, बाल्टिस्तान जैसा सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण स्थान, हमने पाकिस्तान को झोली में भरकर दिया। पूर्व और पश्चिम पाकिस्तान में सीमाओं का यही हाल रहा। आज के बांग्लादेश के चार गाँव तो ऐसे थे, जो रेडक्लिफ ने भारत में दर्शाए थे। लगभग एक माह तक वहां के गांववासियों ने तिरंगा फहराया भी। लेकिन भारत ने अपना हक़ ही नहीं जताया, वहां कोई पहुंचा ही नहीं, पाकिस्तानी सेना पहुंची, और वो चार गाँव पाकिस्तान को गए..!

सावरकर जी की अनेक बातें न मानकर हमने अपने देश का बड़ा नुकसान किया है..!

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