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नर्क से स्वर्ग वापसी का हथकंडा
पाकिस्तानी आतंकवादियों के बीबी बच्चों का भारत भरण पोषण क्यों करे

 आचार्य श्री विष्णुगुप्त

रांची, 01 जनवरी : नर्क से स्वर्ग वापसी। नर्क कौन है और स्वर्ग कौन है, नर्क से स्वर्ग में वापसी किसकी हुई है? नर्क पाकिस्तान है, स्वर्ग भारत है और नर्क से स्वर्ग में वापसी राजिया बीबी की हुई है। यह वापसी सहज है या फिर असहज है, यह वापसी स्वाभाविक है या फिर अस्वाभाविक है, यह वापसी त्रासदीपूर्ण है या फिर हथकंडेपूर्ण है? लेकिन इस तरह की वापसी को लेकर भी बहुत सारी चर्चाएं हो रही हैं और इस तरह की वापसी पर बहुत सारे प्रश्न खड़े किये जा रहे हैं? चर्चाएं और प्रष्न के घेरे में आईएसआई और पाकिस्तान है। इस तरह की वापसी को सधारण वापसी नहीं मानी जा रही है बल्कि एक साजिष के तहत वापसी मानी जा रही है।

अगर एक साजिष के तहत इस तरह की वापसी हो रही है तो यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति बहुत बड़े खतरे की सूचक है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान और उसकी बदनाम गुप्तचर एजेंसी आइ्र्रएसआई भारत विखंडन की नीति के तहत विभिन्न प्रकार की साजिषें रचते रहते हैं। जब पाकिस्तान ने सीधे युद्ध और आतंकवाद के माध्यम से भारत विखंडन की नीति में विफल रहा तब पाकिस्तान ने भारत का इस्लामीकरण करने के हथकंडे अपनाये, भारत पर आबादी आक्रमण कराये और अब भारत में अपने खूंखार नागरिकों की वापसी करा रहा है। भारत को सिर्फ मानवीय दृश्टि से देखने की जरूरत नहीं है। भारत को अपनी सुरक्षा की दृश्टि से भी देखने की जरूरत है। भारत को पाकिस्तान मुस्लिम नागरिकों या फिर पाकिस्तान परस्त मुस्लिमों का धर्मषाला नहीं बनने देना चाहिए,भारत को अपनी अर्थव्यवस्था का भार वैसे विदेशियों को कदापि नहीं बनना चाहिए, वैसे पाकिस्तानी नागरिकों को नहीं बनना चाहिए जो भारत को पाकिस्तानी हिंसा से लहूलुहान करने की नीति में  शामिल थे।

राजिया बीबी कौन है? राजिया बीबी की भारत वापसी कैसे हुई है? राजिया बीबी का जन्म तो कश्मीर में हुआ। पर उसके माता-पिता राष्ट्रद्रोही  निकले, उसके माता पिता भारत विख्ंाडन का स्वाब देखने लगे थे, उसके माता-पिता भारत विखंडन के लिए पाकिस्तान परस्त हो गये थे। जब कोई पाकिस्तान परस्त हो जायेगा तो फिर उसे अपना देष और अपने लोग बूरे लगने लगते हैं। राजिया के माता-पिता की पाकिस्तान परस्ती चरम पर पहुंच गयी और आतंकवादी बनने का स्वाब देखते-देखते पाकिस्तान चले गये थे। उस समय राजिया बीबी की उम्र चार साल थी। जब राजिया बीबी 13 साल की हुई तब उसकी षादी एक आतंकवादी से कर दी गयी। वह आतंकवादी कोई और नहीं बल्कि राजिया बीबी के भाई का ही दोस्त था। भारत विरोधी आतंकवादी को दोस्त बना लेना यह प्रमाणित करता है कि राजिया बीबी के परिजन सीधे तौर पर राश्ट्रद्रोही थे और भारत विरोधी थे। आतंकवादियों की जिंदगी कितने दिनों की होती है? आतंकवादियों की जिंदगी कैसी होती है, यह सब जानते हैं। राजिया बीबी का षौहर एक दिन भारतीय सुरक्षा बलों के द्वारा मारा गया। राजिया बीबी बताती है कि उसके षौहर के मारे जाने के बाद उसे 30 हजार रूपये मिले थे और दो साल तक दस-दस हजार रूपये प्रति महीने मिल रहे थे। दो साल के बाद वे रूपये भी मिलने बंद हो गये थे।
राजिया बीबी कहती है कि उसका जीवन नर्क में बदल गया था, वैसी औरतों के लिए पाकिस्तान नर्क है जिनके षौहर आतंकवादी गतिविधियों में मारे जाते हैं। स्वभाविक तौर पर राजिया बीबी की जिंदगी भी नर्क बनी थी। उसके पास न तो रोजगार था और न ही जीविका का अन्य साधन था। राजिया बीबी के बच्चे भी थे। मुस्लिम औरतें कितनी बच्चे जन्म देती हैं, यह भी स्पश्ट है। राजिया बीबी के सामने बच्चों का पालन करना भी एक समस्या थी। राजिया बीबी कहती है कि उसने अपनी मां की सहायता से पैसे का जुगाड़ किया और भारत आने की सोची। राजिया बीबी पहले पासपोर्ट बनवाती है और उसके बाद कतर जाती है, कतर से नेपाल आती है, नेपाल से भारत में घुसपैठ करती है और कष्मीर पहुंच जाती है। चार दिन थाने में रहने के बाद उसकी जमानत होती है और अब वह आराम से कष्मीर में रह रही है, भारत की सहायता पर पल रही है।

राजिया बीबी की भारत वापसी की कहानी सहज नहीं है, असहज है और बहुत बडे खतरे की घंटी भी है। राजिया बीबी को मालूम था कि वह सीधे भारत नहीं आ सकती है, क्योंकि उसने भारत की नागरिकता खो दी थी और पाकिस्तान की नागरिकता हासिल कर ली थी, उसका आतंकवाद षौहर भी पाकिस्तानी था। भारत आने के लिए उसे वीजे की जरूरत होती और एक आतंकवादी की बीबी और बच्चे को भारत आने का वीजा देने के पहले काफी कुछ सोचना-समझना पड़ता। भारत का वीजा उसे मिलना मुष्किल होता। इसीलिए उसने भारत में घुसपैठ करने की नीति अपनायी। वह साधारण महिला घुसपैठ करने की नीति स्वयं बनायी होगी, यह कहना मुष्किल है। वह पहले कतर जाती है, कतर से नेपाल का विमान पकड़ती है और नेपाल पहुंच जाती है। फिर नेपाल से भारत में घुसपैठ कर जाती है। सिर्फ राजिया बीबी ही ऐसी एक मात्र औरत नहीं है जो अपने आतंकवादी षौहर के मारे जाने के बाद भारत लौटी है। हजारों पाकिस्तान परस्त किसी न किसी बहाने से भारत में वापसी की है।

जानने-समझने की बात यह है कि भारत में आतंकवादियों और विखंडनकारियों की जो घुसपैठ हो रही है उसका माध्यम नेपाल है। नेपाल में विदेषियों का प्रवेष पर कोई वीजा की जरूरत नहीं होती है। इसी का लाभ अब पाकिस्तान परस्त आतंकवादी उठा रहे हैं। पाकिस्तान से उसके आतंकवादी राजिया बीबी की तरह कतर जाते हैं, दुबई जाते हैं, अब्बू धाबी जाते हैं और वहां से विमान पकड़ कर सीधे नेपाल पहुंच जाते हैं। नेपाल के रास्ते से भारत में प्रवेष कर जाते हैं। पाकिस्तान से सीधे भारत मे प्रवेष करने पर भारतीय सेना के हाथों मारे जाने या फिर पकड़े जाने का डर होता है। नेपाल और भारत के बीच सीमा खुली होने का लाभ पाकिस्तानी आतंकवादी उठा रहे हैं। नेपाल अब हमारी सुरक्षा का खतरा बनते जा रहा है। नेपाल अब भारत विरोधी पाकिस्तानी आतंकवादियों का अड्डा भी बन गया है। नेपाल से भारतीय विमान का पाकिस्तानी आतंकवादियों ने अपहरण कर कैसी हिंसा फेलायी थी और भारत की संप्रभुत्ता को लहूलुहान किया था? यह भी जगजाहिर है।
दुनिया भर के मुस्लिम आतंकवादी और कट्रपंथी अपने मूल देष में वापसी के ऐसे ही हथकंडे अपनाते हैं। कभी आईएस के लिए लड़ने और हिंसा के बल पर इस्लाम का विस्तार करने के लिए भारत, यूरोप और अमेरिका से सैकड़ों मुस्लिम युवक-युवतियां इराक और लीबिया,लेबनान, अफगानिस्तान गये थे। अमेरिका ने आईएस का काम-तमाम कर दिया। आईएस की रीढ़ टूट गयी। आईएस की रीढ टूटते ही भारत, यूरोप और अमेरिका से गये मुस्लिम युवकों और युवतियों की जिंदगी भी नर्क बन गयी। अब ऐसे लोग कहते हैं कि हम गुमराह थे, अब अच्छी जिंदगी जीना चाहते हैं, इसलिए हमें एक अवसर दिया जाना चाहिए, यानी की हमें अपने मूल देष की वापसी करनी देनी चाहिए। पर दुनिया का जनमत यह कहता है कि ये कोई गुमराह नहीं थे, ऐसे लोग घोर हिंसक हैं, घोर अमानवीय है। ऐसे लोग अपने मूल देष में वापसी करने के कुछ साल बाद फिर ये इस्लाम के लिए मारने और मरने का अभियान षुरू कर देंगे। इसलिए ऐसे लोगों को इराक,लेबनान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में ही नर्क भोगने के लिए छोड़ देना चाहिए।

कष्मीर में भी मुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा मुफ्ती सईद, फारूख अब्दुला, उमर अब्दुला की सरकारों ने आतंकवादियों के लिए मल्हम नीति लायी थी। मल्हम नीति के तहत हजारों आतंकवादियों की भारत वापसी करायी गयी थी और उन्हें विभिन्न प्रकार की सहायताएं दी गयी थी। इसके अलावा हूर्रियत के जितने भी नेता हैं जो कभी न कभी भारत छोड़कर गये थे और पाकिस्तान की इच्छानुसार भारत में आतंकवाद फैलाया था। हूर्रियत के नेताओं को कष्मीर में सुरक्षित पनहगार दिया गया। पाकिस्तान परस्ती वाले मुस्लिम आतंकवादी यह जानते हैं कि जब वे कमजोर पड़ जायेंगे तो फिर आतंकवाद छोड़ने का नाटक कर मासूम और गुमराह षख्स बन जायेंगे और फिर उनकी सुरक्षित भारत वापसी हो जायेगी।

राजिया बीबी के बच्चे पाकिस्तान में पैदा लिये हुए हैं। राजिया बीबी के बच्चे बड़े होंगे तो वे सीधे तौर पर भारत से नागरिकता मांगेंगे। राजिया बीबी की वापसी विमर्ष में दो बातें प्रमुख हैं। पाकिस्तान नर्क तो जरूर है, जहां पर मनुश्यता है नहीं। राजिया बीबी जैसी हजारों-लाखों महिलाएं बच्चे हैं जो मुस्लिम आतंकवादियों की करतूतों की सजा भुगत रहे हैं। ऐसे महिलाओं और बच्चों को पालने और रोजगार देने के लिए पाकिस्तान सक्षम नहीं है। पाकिस्तान पहली बात यह चाहता है कि राजिया बीबी जैसे पीड़ितों का भरण-पोशण हमें नहीं करना पड़े और इस तरह का भरन पोशण भारत करे। पाकिस्तान की दूसरी बात राजिया बीबी जैसे हथकंडे से भारत की आबादी का इस्लामीकरण करना है। राजिया बीबी जैसे हथकंडे को आबादी आक्रमण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
धारा 370 की समाप्ति के बाद कष्मीर में मुस्लिम आतंकवादियों को मिल रही बहुत सारी सुविधाओं पर विराम जरूर लगा है और पाकिस्तान परस्ती पर भी लगाम लगायी गयी है। पर अब भारत सरकार को राजिया बीबी जैसे हथकंडों के पीछे की पाकिस्तानी नीति को जरूर जमींदोज करने के लिए दृढ़ता दिखानी होगी। हमें घोर मानवाधिकारी बनने की जरूरत नहीं हैं। हमें अपने सुरक्षा हित देखने की जरूरत है। भारत विरोधी और मुस्लिम आतंकवादियों की बीबी-बच्चे का हम भरण-पोशण क्यों करें?


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