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फिल्म क्षेत्र में बढ़े भारतीय संस्कृति एवं मूल्य – नरेन्द्र ठाकुर

फिल्म क्षेत्र में बढ़े भारतीय संस्कृति एवं मूल्य – नरेन्द्र ठाकुररांची, 27 दिसम्बर : भोपाल, बिसनखेड़ी स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में 18 से 20 फरवरी, 2022 तक आयोजित होने वाले ‘चित्र भारती राष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल’ के लिए रविवार को भूमिपूजन किया गया। आयोजन समिति के उपाध्यक्ष लाजपत आहूजा, सामाजिक कार्यकर्ता नरेन्द्र ठाकुर, भारतीय चित्र साधना की न्यासी रंजना यादव एवं एमसीयू के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने विधि-विधान से भूमिपूजन सम्पन्न कराया।

भूमि पूजन के अवसर पर मुख्य अतिथि नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि यह स्पष्ट तौर पर दिखाई देता है कि भारतीय फिल्म निर्माता ही भारत की संस्कृति को चोट पहुंचाने वाली फिल्म बनाते हैं। इसलिए आवश्यकता है कि फिल्मों में राष्ट्रीय विचार का प्रभाव बढ़े। फिल्मों में भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों फिल्म क्षेत्र में बढ़े भारतीय संस्कृति एवं मूल्य – नरेन्द्र ठाकुरका प्रतिनिधित्व बढ़े। समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए समाज की सकारात्मक घटनाओं/बातों पर फिल्में बनाई जानी चाहिए। जिन लोगों ने अपना जीवन का बहुत मूल्यवान समय पर्यावरण, संस्कृति, शिक्षा सहित समाज के अन्य आयामों के संवर्द्धन में लगा दिया, उनके ऊपर फ़िल्म बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि फिल्में समाज को प्रभावित करती हैं। फ़िल्म में दिखाई जाने वाली बातें लोग अपने जीवन में उतारते हैं। इसलिये फ़िल्म कैसी बने, इस बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। जो अच्छा सिनेमा बन रहा है, उसकी सराहना होनी चाहिए। नये फ़िल्म निर्माताओं को तैयार करने एवं प्रोत्साहित करने के प्रयास करने चाहिए। भारतीय चित्र साधना की संकल्पना बताते हुए कहा कि फ़िल्म के क्षेत्र में चित्र भारती बहुत महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। चित्र भारती का यह चौथा राष्ट्रीय आयोजन है। इससे पूर्व इंदौर, दिल्ली और कर्णावती में प्रति दो वर्ष के अंतराल पर राष्ट्रीय लघु फ़िल्म फेस्टिवल के आयोजन हुए हैं।


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