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भारतीय सेना का आत्मविश्वास विश्व में अद्वितीय है : डॉ. मोहन भागवत जी

भारतीय सेना का आत्मविश्वास विश्व में अद्वितीय है : डॉ. मोहन भागवत जीरांची, 18 दिसम्बर : कांगड़ा/धर्मशाला, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने हिमाचल प्रवास के दौरान आज संघ कार्यालय गुप्त गंगा (कांगड़ा) में प्रदेश के नगर/खंड/जिला/विभाग/प्रांत के लगभग 60 प्रचारकों की बैठक में भाग लिया। बैठक प्रातः 9.00 बजे से 10.30 तक और 11.00 से 12.30 तक दो सत्रों में हुई। प्रथम सत्र में प्रचारकों के व्यक्ततिगत विकास पर चर्चा हुई। सभी प्रचारकों को प्रचारक मर्यादा बनाए रखने पर मार्गदर्शन दिया। आगे संघ के शताब्दी वर्ष के लिए तीन वर्षों के रोडमैप पर चर्चा की। प्रदेश में नए गुणवत्ता युक्त कार्यकर्ता बनाने, प्रचारकों की संख्या बढ़ाने और संघ का कार्य गांव-गांव और बस्ती-बस्ती तक तक पहुंचाने के लिए कहा। द्वितीय सत्र में प्रचारकों ने संघ कार्य के विषय में सरसंघचालक जी से अपने मन के प्रश्नों की जिज्ञासा का समाधान किया।

भारतीय सेना का आत्मविश्वास विश्व में अद्वितीय है : डॉ. मोहन भागवत जीभोजनोपरांत दोपहर 03.30 बजे सरसंघचालक जी ने विजय दिवस की स्वर्ण जयंती के अवसर पर धर्मशाला के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पूर्व सैनिकों के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। हाल ही में  हैलिकॉप्टर दुर्घटना में बलिदान हुए सीडीएस जनरल विपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत और अन्य सैन्य अधिकारी व सैन्यकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश की नभ, जल और थल की सुरक्षा में लगे सैन्यकर्मियों को भी नमन किया। 1971 के भारत-पाक युद्ध में बलिदान हुए सैनिकों को भी नमन किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का आत्मविश्वास विश्व में अद्वितीय है और सैन्यकर्मियों ने अपने पराक्रम, वीरता और अनुशासन का लोहा मनवाया है। अपने संगठन में भी हम अनुशासन और देश के लिए सर्वस्व समर्पण की शिक्षा स्वयंसेवकों को देते हैं। संघ युद्धकाल और शांतिकाल में भी सेना के साथ खड़ा रहता है। कोरोना काल में हमारे सैनिकों ने उत्कृष्ट कार्य किए हैं। हमारे स्वयंसेवकों ने भी कोरोना काल में पीड़ितों की अद्वितीय सेवा की है। पूर्व सैनिक भी सेवानिवृत्ति के पश्चात् संघ से जुड़ रहे हैं और कई तो कार्यकर्ता भी बने हैं। पूर्व सैनिक सेवा परिषद पूर्व सैनिकों में कार्य करने वाली संस्था है।

उन्होंने पूर्व सैनिकों का आह्वान किया कि वे संघ के स्वयंसेवकों के परिवारों में जाएं और उनके संघ के प्रति समर्पण को अनुभव करें। एक ही संस्था देश का कल्याण नहीं कर सकती। अतः सभी के सहयोग से भारत विश्व की महाशक्ति और विश्वगुरु बनेगा। इस कार्यक्रम में पूर्व प्रांत संघचालक कर्नल (सेवानि.) रूपचंद जी, क्षेत्र संघचालक डॉ. सीताराम व्यास जी, सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर, कर्नल (सेवानि.) के.सी. खरयाल, कर्नल (सेवानि.) जोगिन्दर सिंह, मेजर (सेवानि.) वैभव सहित 15 अधिकारी व कुल पंजीकृत 848 पूर्व सैनिकों में से 601 उपस्थित रहे। प्रांत संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा जी ने उपस्थित पूर्व सैनिकों, धर्मशाला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य व स्टाफ और मीडिया कर्मियों का धन्यवाद किया।


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