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रांची। आज युवाओं के हृदय सम्राट स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में हुए ऐतिहासिक  उद्बोधन के 126 में वर्ष के अवसर पर ""बदलते परिवेश में हमारी वेदना एवं समाधान"" विषय पर स्वजन स्नेह के द्वारा स्थानीय ऑड्रे हाउस मेयर रोड,कांके रांची में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । संगोष्ठी का शुभारंभ सम्मानित अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन एवं स्वामी विवेकानंद जी की फोटो पर पुष्पार्चन कर किया गया । स्वजन स्नेह के अवधेश ठाकुर ने महामहिम राज्यपाल का गुलदस्ता एवं पुस्तक देकर स्वागत किया । Bharat VSK 11 09 18 2
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सह उद्घाटन कर्ता के रूप में झारखंड राज्य की राज्यपाल महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी, विशिष्ट अतिथि के रुप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्र संघचालक माननीय श्री सिद्धनाथ सिंह जी, सामाजिक कार्यकर्ता सुमन कुमार जी, वार्ड 19 की पार्षद रोशनी खलखो जी एवं कार्यक्रम संयोजक सचदेव मुण्डा जी मंच पर उपस्थित रहे।
 स्वागत भाषण में पार्षद रोशनी खलखो ने कहा कि आज के वर्तमान समय में कहीं उजाला है तो कहीं अंधेरा है। जिसे एक प्रकाशमान ज्योति के द्वारा ही दूर किया जा सकता है। आज देश में महिला सशक्तिकरण की ओर ध्यान दिया गया है ।आज कुछ असामाजिक तत्वों के द्वारा सेवा भाव की आड़ में धर्मांतरण का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है । आज भारत की अखंडता संप्रभुता को जातिवाद के नाम पर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिसकी ओर आज की युवा तरुणाई को ध्यान देने की आवश्यकता है ।उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा से ही देश का विकास संभव है। 
सामाजिक कार्यकर्ता सुमन कुमार ने कहा कि हमारा देश अपनी सनातन संस्कृति तपोबल भूमि के कारण ही विश्व में अग्रणी रहा है। समाज में नेतागिरी देश को आगे ले जाने के लिए होना चाहिए ना कि सत्ता लोभ के लिए ।आज समाज में विभिन्नताएं हैं जिसे दूर कर अंत्योदय अर्थात अंतिम व्यक्ति तक सारीBharat VSK 11 09 18 1 सुविधाएं पहुंचे इस तरह का भाव मन में रखकर चलना होगा ।भारत देश की वेदना एक मां की व्यथा है जिसे हम जैसे पुत्रों को समझने की आवश्यकता है ।हमारा देश ही अन्य देशों को शांति के मार्ग पर चलकर समन्वय स्थापित कर भाईचारगी बढ़ाकर चलने की बात कहता है ।माननीय क्षेत्रीय संचालक जी ने कहा कि जब तक वेदना नहीं होगी तब तक सृजन नहीं होगा। अपने देश की दशा और दिशा क्या होगी यह हम युवाओं को सोचने की आवश्यकता है ।उन्होंने एक गीत गाकर भारत मां की करुण व्यथा को सबके समक्ष सुनाया .......
 ""भारत हमारी मां है ,,
माता का रूप है न्यारा ।
करना उसी की रक्षा
 यह कर्तव्य हमारा ।।""
उन्होंने कहा कि किसी भी वेदना की प्रस्तुति, अभिव्यक्ति सही तरीके से होनी चाहिए। वेदना सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों तरीकों का हो सकता है लेकिन समाज को सही दिशा देने के लिए समन्वय स्थापित करते हुए उचित रास्ते का चयन करना चाहिए। उन्होंने नर (व्यक्ति)की परिभाषा बतलाते हुए कहा कि नर वही है जिसके अंदर सबों के प्रति संवेदना हो ।जिसके अंदर समाज के हर वर्ग हर जाति हर व्यक्ति के प्रति  संवेदना हो , प्रेम हो ।
 महामहिम राज्यपाल महोदया ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो यात्रा का वर्णन करते हुए बतलाया की स्वामी विवेकानंद ने ही सहनशीलता एवम सार्वभौमिकता का पाठ सभी देशों मे पढ़ाया है। उन्होंने कहा कि सभी धर्म सत्य हैं ।यदि भारत को जानना है तो विवेकानंद को जानना होगा । युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य होने चाहिए, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण मानव के लिए व्यवहारिक शिक्षा है। उन्होंने बतलाया कि किसी भी देश के लिए आर्थिक प्रगति में तकनीकी शिक्षा की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने  युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे नेकी की राह अपनाएं । उन्होंने कहा कि हमारी भारत माता को स्वर्ग से भी बड़ी कहा गया है ।..उन्होंने संस्कृत का एक श्लोक कहा  
""जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी""
 माननीय महोदया ने कहा कि हमारी एक ही माता नहीं है बल्कि 5 माताएं हैं ...नदी माता, गाय माता, मातृभूमि, मातृभाषा और भारत माता। 
 उन्होंने वर्तमान समस्या के ऊपर कहा कि पूर्व मे भी भारत मे विभिन्न जातियों ,धर्म में विभाजित था परंतु उस समय का माहौल दूसरों दूसरे देशों के लिए अनुकरणीय था ।
परंतु आज उस जाति धर्म के नाम पर सत्ता के लोभ में जिस तरह का कुकृत्य चल रहा है समाज में वह कतई बर्दाश्त करने वाला और देशहित के लिए नहीं हो सकता ।
उन्होंने कहा की सरकार बनाने के बाद सारी जिम्मेवारी सरकार की ही नहीं होती है बल्कि समाज के लोगों का भी दायित्व है कि सरकार को विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन देते रहें । उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा एक ऐसा मार्ग है जिसके माध्यम से सभी उपाय प्राप्त किए जा सकते हैं ।युवा खुद स्मार्ट बने और सभी को स्मार्ट बनाने में सहयोग भी करें ताकि देश की अखंडता संप्रभुता पर किसी प्रकार की आंच ना आए। देश को पुनः विश्व पटल पर ले जाने के लिए समय जरूर लगेगा पर इसके लिए युवाओं को प्रयत्नशील रहने की आवश्यकता है ।साथ ही करनी और कथनी दोनों को समान करने की आवश्यकता है । 
कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक सचदेव मुणडा ने किया एवं मंच संचालन श्री अनिल कुमार ने किया।

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