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ASI संरक्षित मंदिर – संरक्षित मंदिरों में पूजा-अर्चना प्रारंभ करने की तैयारी, संरक्षित मंदिरों की श्रेणी में 1000 से अधिक मंदिर शामिल

ASI संरक्षित मंदिर – संरक्षित मंदिरों में पूजा-अर्चना प्रारंभ करने की तैयारी, संरक्षित मंदिरों की श्रेणी में 1000 से अधिक मंदिर शामिलरांची, 24 मई नई दिल्ली, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में आने वाले बंद मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां शुरू करने की तैयारी तकी जा रही है। मंदिरों में पूजा-पाठ की अनुमति देने के लिए 1958 के कानून में संशोधन किया जा सकता है। शीतकालीन सत्र में इससे संबंधित संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे इन मंदिरों का रख-रखाव आसान होगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश में एएसआइ के संरक्षण में लगभग 3,800 धरोहर हैं। इनमें एक हजार से अधिक मंदिर हैं। इनमें से केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और उत्तराखंड के जागेश्वर धाम जैसे बहुत कम मंदिर हैं, जहां पूजा-अर्चना होती है। अधिकतर मंदिर बंद पड़े हुए हैं और उनमें किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि प्रतिबंधित है। इनमें जम्मू-कश्मीर स्थित मार्तड मंदिर जैसे बहुत सारे मंदिर शामिल हैं, जिनके खंडहर के रूप में अवशेष ही बचे हैं।

पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा मार्तंड मंदिर में पूजा करने पर एएसआइ ने स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया था।

प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 में संरक्षित मंदिरों में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। संस्कृति मंत्रालय, के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंदिर को संरक्षित करने के जिस उद्देश्य से यह कानून लाया गया था, वह पूरा नहीं हो रहा है. उल्टे लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित होने के कारण मंदिरों की स्थिति खराब हो रही है।

एएसआइ ने इन मंदिरों को संरक्षित तो कर लिया है, लेकिन उनकी देखभाल के लिए उसके पास उतने कर्मचारी भी नहीं हैं। कई मंदिरों की तो साल में एक बार साफ-सफाई की जाती है, शेष समय उनमें ताले जड़े रहते हैं। पूजा-पाठ व अन्य धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने से न सिर्फ उन स्थानों की देख-रेख सुनिश्चित हो सकेगी, बल्कि इनके संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों का जुड़ाव भी होगा।

एएसआइ संरक्षण में बंद पड़े मंदिरों की स्थिति अलग-अलग है। कई मंदिरों में मूर्तियां खंडित अवस्था में हैं तो कई जगह मूर्तियां हैं ही नहीं। हिन्दू शासकों के किलों में कई ऐसे मंदिर मौजूद हैं। वहीं, कई जगहों पर मंदिर के नाम पर सिर्फ खंडहर बचे हैं। ऐसे सभी मंदिरों को वर्गीकृत किया जा रहा है। जिन मंदिरों में मूर्तियां सही-सलामत हैं और भवन की स्थिति भी ठीक है, वहां तत्काल पूजा-पाठ की इजाजत दी जा सकती है।

खंडित मूर्तियों वाले मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा कर नई मूर्तियों को स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा खंडहर में तब्दील मंदिरों के पुनर्निर्माण की भी इजाजत मिल सकती है। इस दिशा में काम शुरू हो गया है और सरकार का प्रयास जल्द से जल्द इन मंदिरों को फिर से धार्मिक गतिविधियों के लिए खोलने का है।


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