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चित्रपट झारखंड की फिल्म निर्माण कार्यशाला संपन्न

भारतीय सिनेमा की शुरुआत ही इसके सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना से हुई थी - आलोक कुमार

चित्रपट झारखंड की फिल्म निर्माण कार्यशाला संपन्नरांची, 21 जुलाई  : आज चित्रपट झारखंड की फिल्म निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख श्री आलोक कुमार ने मां भारती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन तथा पुष्पार्चन कर किया I

अपने अध्यक्षीय संबोधन में श्री आलोक कुमार ने बताया कि सबसे पहले लगभग हजार वर्ष पहले भरत मुनि ने नाट्यशास्त्र दिया जिसे पांचवा वेद भी कहते हैं। बाद में कालिदास आदि अन्य नाटककारों ने नाटक लिखे और मंचन किया। तुलसीदास जी की रामचरितमानस की रचना के पश्चात रामलीला मंडजियां बनी और समाज को दिशा देने लगी। उन्होंने कहा कि देवी देवताओं की मूर्तियों को पहली बार कागज पर लाने का कार्य सर्वप्रथम राजा रवि वर्मा जी ने किया । बाद में ने मुंबई आ गए जहां भारतीय सिनेमा के भीष्म पितामह दादा साहब फाल्के उनके सानिध्य में आए और उनसे उनके शिष्य बन गए बाद में महान चित्रकार रवि वर्मा से प्राप्त कैमरे से ही उन्होंने पहली भारतीय मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई और भारतीय फिल्म के निर्माण का श्रीगणेश किया।

चित्रपट झारखंड की फिल्म निर्माण कार्यशाला संपन्नयह कार्यशाला फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने, फिल्मों को नया आयाम देने तथा इस क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से चित्रपट झारखंड द्वारा आयोजित की गई। इसे एक अभियान की तरह पूरे झारखण्ड में चलेगा जिसकी यह पहली कार्यशाला थी। इसमें 25 प्रतिभागियों का भाग लेने का अवसर मिला है। शीघ्र ही ऐसी तीन और कार्यशाला जमशेदपुर, धनबाद एवं देवघर में आयोजित की जानी है।

ये कार्यशालाऍं पूर्णतः नि:शुल्क रखी गयी हैं। प्रतिभागागियों को सिर्फ आवागमन अपने खर्च पर करनी है।

इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए कार्यशाला संयोजक नंद किशोर सिंह ने कहा कि देश की परंपरा और संस्कृति के ऊपर फिल्में बननी चाहिए। निर्माताओं को इस बारे में सोचना चाहिए और क्षेत्र में आगे आना चाहिए । उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए आशा व्यक्त की कि यह कार्यशाला उनके जीवन में एक दिशा देने का काम करेगी। कार्यशाला निदेशक डॉo सुशील कुमार अंकन ने कहा कि यह कार्यशाला उन लोगों को मंच देने का काम कर रही है जो सुदूर गांव में हैं एवं निर्माण में अभिरुचि रखते हैं। कार्यशाला में उद्घाटन एवं समापन के सिवाय निर्माण पर कई सत्र हुए जिन्हें कार्यशाला प्रशिक्षक शैलेद्र भट्ट, राजेंद्र प्रसाद, सुशील अंकन, निरंजन कुमार तथा दीपक प्रसाद ने लिया।

कार्यशाला में सह प्रचार प्रभारी एवं प्रचार प्रमुख संजय जी एवं धनंजय जी के अलावा पियुष कुमार एवं सुनील मित्तल ने सहयोग किया। कार्याशाला के व्यवस्थापक राकेश रमण ने उदघाटन सत्र का संचालन करते हुए कहा कि आज फिल्म निर्माण में जो कमजोरी देखी जा रही है उसे सार्थक दिशा देने का यह एक अति लघु प्रयास है जिसे आज की सफलता के बाद और भी आयाम दिये जायेंगे।

कार्यशाला में प्रयोग के तौर पर एक लघु फिल्म का निर्माण किया गया।
अंत के समारोप सत्र को संबोधित करते हुए प्रांत प्रचारक श्री दिलीप कुमार  ने कहा की फिल्म निर्माण की यह कार्यशाला सफल रही है और आज जरूरत है अपने भारतीय मूल्यों को फिर से स्थापित करने के लिए फिल्म निर्माण के माध्यम का प्रयोग किया जाए। इस अवसर पर सह प्रांत कार्यवाह श्री राकेश लाल जी, वीर कुंवर सिंह विचार मंच के श्री ललन सिंह जी एवं व्यवसायी तथा फिल्म निर्माता श्री अजय कुमार सिंह के द्वारा प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया।
धन्यवाद ज्ञापन श्री सुमित मित्तल जी के द्वारा किया गया। अंत में वंदे मातरम के समवेत गायन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

नंदकिशोर सिंह
कार्यशाला संयोजक।


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