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प. बंगाल : झूठ और हिंसा के सहारे चलती सरकार

रांची, 01 जून : नई दिल्ली, प बंगाल की ममता बनर्जी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार पूर्व मुख्य सचिव अलपन बंधोपाध्याय को लेकर आमने सामने है। यह पूरा विवाद पीएम मोदी के बंगाल दौरे के बाद उठा। दरअसल, पीएम मोदी चक्रवात यास के बाद नुकसान का जायजा लेने बंगाल दौरे पर पहुंचे थे। वहीं, ममता बनर्जी समेत बंगाल का कोई भी अधिकारी इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। वहीं, इसके बाद केंद्र ने मुख्य सचिव अलपन बंधोपाध्याय दिल्ली बुलाया था। लेकिन ममता सरकार ने उन्हें रिलीव नहीं किया और अलपन ने रिटायरमेंट ले लिया। इसके बाद ममता ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बना लिया। अब केंद्र ने अलपन को शोकॉज नोटिस भेजा है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के सेक्शन 51 (B) का इस्तेमाल करके केंद्र द्वारा भेजे गए इस नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए ? उनसे तीन दिन के अंदर जवाब मांगा गया है।

इस पूरे मामले को लेकर ममता लगातार केंद्र पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। अब सरकारी सूत्रों ने ममता के बयानों पर फैक्ट जारी किया है। आईए जानते हैं कि ममता ने क्या क्या बयान दिए और उनकी सच्चाई क्या है?

ममता ने क्या कहा और सरकार के सूत्रों ने क्या जवाब दिया ?

बयान 1- मुझे पीएम के कार्यक्रम और मीटिंग की जानकारी देर से मिली थी। मैंने पीएम से मीटिंग के लिए अपने कार्यक्रमों में भी बदलाव किया।

फैक्ट- पीएम मोदी का दौरा चक्रवात YAAS से हुए नुकसान का जायजा लेना था। इसलिए इसे चक्रवात यास से पहले तय नहीं किया जा सकता था। यहां तक कि इसी तरह से पीएम मोदी ने पिछले साल अम्फान तूफान के बाद भी दौरा किया था। इस बार ओडिशा और बंगाल दोनों को एक ही समय जानकारी दी गई। ओडिशा ने इसे अच्छे से मैनेज किया, जबकि यह बंगाल से पहले हुआ।

बयान 2- मैंने पीएम से मिलने के लिए इंतजार किया।

फैक्ट- पीएम मोदी कलाईकुंडा 1.59 पर पहुंचे थे। जबकि ममता बनर्जी का विमान 2 बजकर 10 मिनट पर पहुंचा। इससे यह साफ होता है कि पीएम मोदी को ममता के लिए इंतजार करना पड़ा। यह टीएमसी के सांसद ने भी ट्वीट कर बताया। साथ ही उन्होंने कहा, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है कि पीएम को इंतजार करना पड़ा। चॉपर से उतरकर वे 500 मीटर की दूरी तय कर मीटिंग स्थल तक पहुची। पीएम से मुलाकात के बाद ममता 2 बजकर 35 मिनट पर निकल गईं।

वास्तव में, उन्होंने 25 मिनट में ही 500 मीटर की यात्रा की और पीएम से मुलाकात कर चली गईं। वह पीएम के जाने से पहले चली गईं, जो स्पष्ट रूप से स्वीकृत प्रथाओं और प्रोटोकॉल के विपरीत है। साफ है कि ममता बनर्जी का इंतजार करने का बयान पूरी तरह झूठा है और उन्होंने पीएम को इंतजार कराया।

बयान 3- मेरे कार्यक्रम पहले से तय थे, यह जरूरी नहीं कि हर बार मुख्यमंत्री को ही पीएम को रिसीव करना पड़ा, कभी कभार कुछ दूसरे कार्यक्रम भी होते हैं?

फैक्ट- ममता बनर्जी मीटिंग के लिए तैयार थी। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि इसमें विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी शामिल हो रहे हैं, उन्होंने अपना मन बदल लिया। इसका उन्होंने अपने पत्र में भी जिक्र किया है। इससे यह साफ हो जाता है कि पहले से तय कार्यक्रम का कोई मुद्दा नहीं था। इस बात की पुष्टि बंगाल के गवर्नर ने ट्वीट कर की है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ममता ने बताया है कि वे विपक्ष के नेता के चलते बैठक का बहिष्कार कर रही हैं।

बयान 4- ममता ने कहा, उनसे कहा गया था कि वे सागर में 20 मिनट इंतजार करें, क्योंकि पीएम का चॉपर लैंड करने वाला है। इसके चलते उन्हें हवा में 15 मिनट से ज्यादा इंतजार करना पड़ा।

फैक्ट- जब पीएम किसी एयरपोर्ट पर पहुंचते हैं, तो सभी पहले पहुंचते हैं, उन्हें भी ऐसा ही करना चाहिए था। क्योंकि पीएम की सुरक्षा का जिम्मा एसपीजी के हाथ में होता है।

बयान 5 - ममता ने कहा, मुख्य सचिव के ट्रांसफर का फैसला एकतरफा है, इससे स्तब्ध हूं; यह राज्य के साथ पूर्व परामर्श के बिना लिया गया आदेश है; आदेश कानूनी रूप से अस्थिर, अभूतपूर्व, असंवैधानिक है।

फैक्ट- यह आदेश पूरी तरह से संवैधानिक है क्योंकि मुख्य सचिव एक आईएएस अफसर हैं। उन्होंने अपने संवैधानिक कर्तव्यों की उपेक्षा की इसी के चलते पीएम की बैठक में पश्चिम बंगाल सरकार का कोई भी अधिकारी शामिल नहीं हुआ।

मुख्य सचिव के रिटायरमेंट से पता चलता है कि ममता बनर्जी बैकफुट पर हैं। वह जानती हैं कि मामले के तथ्य मुख्य सचिव के खिलाफ हैं और उनका व्यवहार ऐसा था कि यह सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। वे एक आईएएस अफसर हैं और यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य था कि समीक्षा बैठक निर्धारित समय पर हो। आईएएस अफसरों से राजनीति का हिस्सा बनने की उम्मीद नहीं है। ममता यह सब जानती हैं और उन्हें बचाने के लिए उनका रिटायर होना ही अंतिम प्रयास है।

मुख्य सचिव के विस्तार के लिए पीएम से अपील से लेकर उन्हें रिटायर करने तक ममता बनर्जी ने कुछ ही घंटों में बड़ा यू टर्न ले लिया।

बयान 6- केवल कुछ दिन पहले, भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण समय में राज्य की सेवा करने के लिए मुख्य सचिव की सेवा को तीन महीने तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी; नियत प्रक्रिया के अनुसार आपसी लिखित परामर्श के बाद जारी 24 मई को विस्तार देने का आदेश दिया गया था।

फैक्ट- तथ्य यह है कि भारत सरकार मुख्य सचिव की सेवा का विस्तार करने के लिए सहमत हुई थी, इससे साफ होता है कि केंद्र पश्चिम बंगाल के साथ पूर्ण सहयोग और द्वेष के बिना काम कर रहा है।

बयान 7- आपने अपनी पार्टी के एक स्थानीय विधायक को शामिल करने के लिए बैठक की संरचना में संशोधन किया। उनके पास पीएम-सीएम की बैठक में शामिल होने की कोई वजह नहीं थी; आप अगर राज्यपाल और केंद्रीय मंत्रियों को बैठक में शामिल करते तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होती।

फैक्ट- कथित विधायक प बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। साथ ही वे प्रभावित क्षेत्र से चुने गए विधायक भी हैं। गैर-भाजपा शासित राज्यों में पूर्व में कई बैठकें हो चुकी हैं जहां अन्य दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे हैं।

बयान 8- मुख्य सचिव ने एक वरिष्ठ अधिकारी को संदेश भेजा जो आपके साथ इस मुद्दे को सुलझाने या उस बैठक से पहले पीएम-सीएम की बैठक की व्यवस्था करने के लिए आए थे; हमें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली; मेरे निदेशक (सुरक्षा) भी इस संबंध में एसपीजी के संपर्क में थे।

फैक्ट- ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के बैठक में शामिल होने की खबर के बाद ही बहिष्कार करने का फैसला किया किया था। इस पर भारत सरकार द्वारा कोई मुद्दा नहीं बनाया गया था, क्योंकि जो मायने रखता था वह था चक्रवात राहत कार्य। उन्हें यह सुझाव दिया गया था कि समीक्षा बैठक के तुरंत बाद पीएम उनसे मिलेंगे क्योंकि यही वजह थी कि उन्होंने पश्चिम बंगाल का दौरा किया था।

यह महसूस करते हुए कि उन्हें समीक्षा बैठक समाप्त होने तक इंतजार करना पड़ सकता है, उन्होंने अन्य अधिकारियों को भी बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया और प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित समीक्षा बैठक को रद्द कर दिया।

बयान 9- मैंने रिपोर्ट देने के लिए मुख्य सचिव के साथ बैठक में शामिल हुई। इस रिपोर्ट को पीएम मोदी को सौंपा। उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से मेरे हाथ से लिया; और मैंने उनसे जाने की अनुमति मांगी। पीएम ने इसकी अनुमति दी।

फैक्ट- पीएम मोदी ने ममता बनर्जी को बैठक से जाने की अनुमति नहीं दी थी।


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