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 धरती आबा का जन्मदिन राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनाया

 धरती आब का जमदिन राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनायारांची, 15 नवंबर : धरती आबा बिरसा मुंडा जी की 145 वी जयंती विश्व संवाद केंद्र झारखण्ड के द्वारा  बुद्धा साइंस एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूट, कोकर के सभागार में पूरे धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर श्री युगल किशोर वेदिया द्वारा बांसुरी की मधुर तान पर भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से जुड़ी एक गीत की प्रस्तुति की गई।  मुख्य वक्ता चरवा भगत ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन वृत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि -झारखंड क्षेत्र के छोटा नागपुर में रहने वाले जनजाति समुदाय है मुंडा, उसी समुदाय में 15 नवंबर 1875 को भगवान बिरसा मुंडा का जन्म श्री सुगना मुंडा और श्रीमती कर्मी मुंडा के घर में हुआ था । बचपन से ही उन्हें बांसुरी और चित्रकारी में काफी मन लगता था। रग रग में बसा देश भक्ति इनके जन्मजात गुण थे। वास्तव में भगवान बिरसा जनजाति समुदाय के एक ऐसे महान नायक के रूप में अवतरित हुए धरती आब का जमदिन राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के रूप में मनायाजब यह समाज ईसाई मिशनरियों के चंगुल में धीरे-धीरे जकड़ा जा रहा था। झारखंड की धरती रतनगर्भा ही नहीं बल्कि भगवान बिरसा मुंडा जैसे महान पुरुषों का कर्म स्थल भी रहा है। उनका उलगुलान 1857 की क्रांति के समान विश्व में एक नया क्रांति का स्वरूप दिया। झारखंड में उस समय एक ओर अंग्रेजी गुलामी तो दूसरी ओर ईसाइयो के मतांतरण से त्रस्त था। ऐसे में यह महान नायक जनजाति समुदाय को एक नई दशा और दिशा देने का कार्य किया। इस अवसर पर रामेश्वर जी, सुप्रिया भारती, वरीय कार्यपालक अभियंता, रामप्रवेश प्रसाद,सी.आई. पी. के सीनियर लाइब्रेरियन जितेंद्र कुमार जी, समाजसेवी  दीपक लोहिया जी  एवं शशि भूषण पांडे जी ने अपने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के उपरांत सभी अतिथियों के द्वारा कोकर स्थित भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर जाकर पुष्पांजलि अर्पित की गई।


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